चाय के साथ-साथ कुछ कवितायें भी हो जाये तो क्या कहने...

Tuesday, August 1, 2017

इंतज़ार


इंतज़ार तेरे पास आने का
इंतज़ार तुझे देख भर लेने का
इंतज़ार तुम्हे गले से लगा लेने का
इंतज़ार तुम्हारा माथा चूम कर हौले से हाथ दबाने का
इंतज़ार यह कहने का कि मै हूँ तुम्हारे लिये
इंतज़ार तुझसे मिलने का
मिलकर शिकायत करने का
कि तुम अब तक अकेले कैसे रहे
शिकायत यह भी कि
तुमको अब तक याद आई नहीं
आई भी तो उतनी नहीं ही आई होगी
जितनी की मुझे आती है
काश याद का कोई पैरामीटर हो
तो कही जाये वो तमाम बातें
तुम्हारे बग़ैर बीती हुई रातें
और जमाने भर की शिकायतें
शायद कहते वक्त
जुबां का साथ न दे पाये
आँख दे जाये धोखा और दिल बंद करदे धड़कना
और भी बहुत सी बातें हैं
मेरे-तुम्हारे इस इंतज़ार में
सुनो... सच कहूँ तो...
तुम्हें भी यह समझना होगा कि
मेरे तुम्हारे दरमियाँ
कभी दूरी होती ही नही है...।
#सुनीता शानू

Sunday, July 30, 2017

सैंड टू ऑल




सैंड टू ऑल की गई
तुम्हारी तमाम कविताओं में
ढूँढती हूँ वो चंद पंक्तियाँ
जो नितान्त व्यक्तिगत होंगी
जो लिखी गई होंगी
किसी ख़ास मक़सद से
किन्हीं ख़ास पलों में
सिर्फ मेरे लिये
नहीं होगा उन पर
किसी और की वाह वाही का ठप्पा भी
लेकिन
सैंड टू ऑल की गई सारी कवितायें
बिछी पड़ी हैं सबके आगे
सुनो!
कुछ नया लिखो न
सिर्फ मेरे लिये...
शानू

Friday, December 25, 2015

ताकि प्रेम बना रहे

मेरी नर्म हथेली पर 
अपने गर्म होंठों के अहसास छोड़ता 
चल पड़ता है वो
और मै अन्यमनस्क सी
देखती हूँ अपनी हथेली
काश वक्त रूक जाये,
बस जरा सा ठहर जाये
लेकिन तुम्हारे साथ चलते 
घड़ी की सुईयां भी दौड़ती सी लगती है 
धीरे से मेरा हाथ मेरी गोद में रखकर,
हौले से पीठ थपथपाता है वो
अच्छा चलो-
अब चलना होगा,
सिर्फ प्रेम के सहारे ज़िंदगी नहीं कटती,
कुछ कमाई करलें 
तो प्रेम भी बना रहे, 
लेकिन मैने कब माँगा है तुमसे कुछ! 
वह सिर्फ मुस्कुराया और चल दिया
मै देखती रही...
बढता, गहराता, इठलाता, खूबसूरत प्रेम 
जो मेरे बदन से लिपटी रेशमी साड़ी सा 'मुलायम, 
घर में बिछे क़ालीन सा शालीन,
और भारी-भरकम वेलवेट के गद्दों सा गुदगुदा बन गया था
मेरी नर्म हथेली पर नमी सी थी
दूर कहीं लुप्त हो गई थी 
इमली के पेड़ पर पत्थर से उड़ती चिड़िया, 
लुप्त हो गई थी 
दो जोड़ी आँखे जो कोई फ़िल्मी गीत गुनगुनाती 
एक आवारा ख़्वाब बुना करती थी, 
हाँ प्रेम को ताउम्र बनाये रखना 
ही जरूरी होता है...।
शानू